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परमाणु बिजलीघर के विरोध में 4 दिन से तालाब में थीं विमला, इलाज के दौरान मौत

जन प्रकाशन 23 अक्टूबर 2026
2 मिनट में पढ़ें
परमाणु बिजलीघर के विरोध में 4 दिन से तालाब में थीं विमला, इलाज के दौरान मौत

रीवा में 28 हजार करोड़ की परियोजना का विरोध कर रहे ग्रामीणों को जमीन, पानी और स्वास्थ्य पर असर की आशंका

रीवा। प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर के विरोध में चार दिन से चल रहे जल सत्याग्रह के बीच गुरुवार को आदिवासी महिला विमला कोल की मौत हो गई। रीवा के रोझौही गांव की रहने वाली विमला ग्रामीणों के साथ तालाब में उतरकर 28 हजार करोड़ रुपए की परियोजना का विरोध कर रही थीं। बुधवार रात उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें मनगवां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गुरुवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

पत्नी को खोने के बाद छलका पति का दर्द

विमला के पति जमुना कोल ने पत्नी की मौत के बाद प्रशासन से सवाल करते हुए कहा, “मेरा सब कुछ बर्बाद हो गया। क्या प्रशासन मेरी पत्नी लौटा सकता है? क्या उसे जिंदा कर सकता है?” उन्होंने बताया कि विमला शुरुआत से ही ग्रामीणों के साथ परमाणु बिजलीघर के निर्माण का विरोध कर रही थीं। महिला की मौत के मामले में कलेक्टर ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जमीन और पानी पर असर की आशंका से विरोध

सरई कला और रोझौही गांव के ग्रामीणों को आशंका है कि परमाणु बिजलीघर बनने से उनकी जमीन, पानी और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते ग्रामीण परियोजना का विरोध कर रहे हैं। अक्टूबर में स्थल की जांच के लिए पहुंची बोरिंग मशीनों को भी ग्रामीणों ने रोक दिया था। इसके बाद ग्रामीणों ने तालाब में उतरकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया।

समझाइश के बाद भी पीछे नहीं हटे ग्रामीण

प्रदर्शनकारियों को मनाने के लिए विधायक नरेंद्र प्रजापति और कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने भी प्रयास किए, लेकिन ग्रामीणों का विरोध जारी रहा। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल परियोजना के लिए जमीन आवंटित नहीं की गई है। अभी केवल प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता की जांच की जा रही है। ऐसे में परियोजना को लेकर ग्रामीणों की आशंकाओं और प्रशासन के पक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है।

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श्रेणियाँ:राजनीतिमध्यप्रदेशजबलपुर

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