
इंदौर। एक तरफ नगर निगम मुख्यालय पर सफाईकर्मी अपनी मांगों को लेकर नारे लगा रहे थे, दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर कचरे के ढेर दिखाई देने लगे। मंगलवार शाम तक आंदोलन का असर कई इलाकों की सफाई व्यवस्था पर साफ नजर आया। गीला और सूखा कचरा सड़कों के किनारे ही पड़ा रहा और धीरे-धीरे जगह-जगह फैलता गया।
एमआईजी थाने के सामने नेहरू नगर, विकास नगर, अमर टेकरी और रुस्तम का बगीचा सहित आसपास के क्षेत्रों में शाम के बाद हालात बिगड़ने लगे। कई स्थानों पर कचरा इतना जमा हो गया कि सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी हुई। जिन सड़कों पर रोजाना सफाई के बाद स्वच्छता नजर आती थी, वहीं मंगलवार रात कचरे के ढेर नजर आए।
सड़कों पर फैले कचरे ने स्थानीय लोगों को भी सवाल करने पर मजबूर कर दिया। रहवासियों का कहना था कि सफाईकर्मियों की मांगों पर प्रशासन को समाधान निकालना चाहिए, लेकिन आंदोलन का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर नहीं पड़ना चाहिए। कुछ लोगों ने यह भी आशंका जताई कि कई जगह कचरा जानबूझकर सड़क पर फैलाया गया।
नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर सफाईकर्मी लगातार दूसरे दिन नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन करते रहे। बड़ी संख्या में कर्मचारी घंटों धूप में बैठे और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा है कि यदि दो से चार दिन में उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो वे हड़ताल पर जाने का निर्णय ले सकते हैं।
मंगलवार शाम की स्थिति ने संकेत दे दिए हैं कि आंदोलन लंबा चला तो इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है। अभी कुछ इलाकों में कचरा उठना प्रभावित हुआ है, लेकिन हड़ताल की स्थिति बनी तो समस्या कई क्षेत्रों तक फैल सकती है।
इंदौर लगातार आठ बार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है। ऐसे में सड़कों पर जमा कचरा सिर्फ सफाई व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता की पहचान के सामने भी चुनौती है। अब असली परीक्षा निगम और आंदोलनरत सफाईकर्मियों के बीच समाधान की है—क्योंकि विवाद जितना लंबा चलेगा, उसका असर सड़क पर उतना ही ज्यादा दिखाई देगा।
28 अक्टूबर 2026