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एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी अस्पतालों में जांच का दायरा बढ़ा, 250 तरह की जांचें मुफ्त; हर महीने 10 हजार से ज्यादा मरीजों को फायदा

जन प्रकाशन 30 सितंबर 2026
3 मिनट में पढ़ें
एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी अस्पतालों में जांच का दायरा बढ़ा, 250 तरह की जांचें मुफ्त; हर महीने 10 हजार से ज्यादा मरीजों को फायदा

निजी लैब में हजारों रुपए खर्च होने वाली कई जांचें अब एमजीएम से जुड़े अस्पतालों में नि:शुल्क;

ओपीडी का आंकड़ा भी 5 हजार के पार

इंदौर। सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ जांच की सुविधा भी लगातार मजबूत हो रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध 8 अस्पतालों में अब करीब 250 तरह की जांचें मरीजों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें कई ऐसी जांचें भी शामिल हैं, जिनके लिए निजी पैथोलॉजी सेंटर में मरीजों को हजारों रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। जांच की व्यवस्था बेहतर होने के साथ रिपोर्ट तैयार होने में लगने वाला समय भी कम हुआ है।

मोबाइल पर मिल रही जांच रिपोर्ट

अस्पतालों में जांच के बाद मरीजों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल आने की जरूरत न पड़े, इसके लिए रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। मरीज अपने मोबाइल पर जांच रिपोर्ट देख सकते हैं। इससे समय की बचत के साथ अस्पताल में अनावश्यक भीड़ भी कम करने में मदद मिल रही है।

10 हजार रुपए तक की जांच का खर्च बच रहा

एमजीएम से संबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध जांचों में कुछ ऐसी जांचें भी हैं, जिनकी निजी क्षेत्र में कीमत करीब 10 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। सरकारी अस्पताल में ये जांचें नि:शुल्क होने से मरीजों को इलाज के दौरान होने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिल रही है। खासकर गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

हर महीने 10 हजार से ज्यादा जांचें

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविन्द घनघोरिया के अनुसार, वर्तमान में संबद्ध अस्पतालों में हर महीने 10 हजार से अधिक जांचें नि:शुल्क की जा रही हैं। पहले जांच में इस्तेमाल होने वाले जरूरी केमिकल और संसाधनों की उपलब्धता नियमित नहीं रहने से व्यवस्था प्रभावित होती थी। कई बार कुछ दिनों तक जांचें चलती थीं और फिर संसाधन खत्म होने पर कई दिनों तक बंद करनी पड़ती थीं। अब संसाधनों की उपलब्धता बेहतर होने से जांच व्यवस्था लगातार संचालित हो रही है।

ओपीडी में भी बढ़ा मरीजों का दबाव

जांच सुविधाओं में सुधार का असर अस्पतालों की ओपीडी पर भी दिखाई दे रहा है। पहले रोजाना करीब 3 हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 5 हजार से अधिक हो गई है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, जांच और उपचार की सुविधाएं एक ही जगह मिलने से मरीजों का सरकारी अस्पतालों की ओर रुझान बढ़ा है।

बाहर की जांच पर खर्च कम

250 तरह की जांचें नि:शुल्क होने से मरीजों को जांच के लिए निजी लैब का सहारा कम लेना पड़ रहा है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपचार का खर्च घटाने में मदद कर रही है। जांच, रिपोर्ट और उपचार की सुविधाएं एक ही सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में मिलने से मरीजों को इलाज की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान हो रही है।

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श्रेणियाँ:इंदौरमध्यप्रदेशराजनीतिस्वास्थ्यशिक्षा

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