
भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चा जारी है। सरकार के गठन के बाद अब कैबिनेट में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के हालिया संकेतों के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो तीन मौजूदा मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि पांच नए चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। अनुभवी के साथ ही युवा विधायकों को भी मौका मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में होने वाला यह बदलाव सिर्फ भोपाल में तय नहीं होगा। इसमें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका अहम रहेगी। दिल्ली दरबार के इशारे और संगठन की राय के बाद ही अंतिम तस्वीर साफ होगी। पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और आगामी राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल का नया स्वरूप तैयार कर सकता है।
मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के बीच कुछ मंत्रियों को लेकर पार्टी स्तर पर मंथन चल रहा है। विजय शाह, धर्मेंद्र लोधी, लखन पटेल और प्रतिमा बागरी के नाम को लेकर भी संगठन को फैसला करना है। विवादित बयानों और अलग-अलग मामलों में सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऐसे में माना जा रहा है कि नेतृत्व अब मंत्रियों के प्रदर्शन और राजनीतिक छवि को भी बदलाव का आधार बना सकता है।
कैबिनेट विस्तार की स्थिति बनने पर कई पुराने और अनुभवी चेहरों की वापसी हो सकती है। संभावित नामों में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, सिंधिया समर्थक बृजेंद्र सिंह यादव, शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अर्चना चिटनिस और मालिनी गौड़ शामिल हैं। इनमें से पांच नामों पर अंतिम मुहर लगने की चर्चा है। हालांकि, अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
संभावित फेरबदल में सिर्फ नए मंत्रियों की एंट्री और पुराने चेहरों की विदाई ही नहीं होगी। दो वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा उलटफेर किया जा सकता है। सरकार कुछ महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी में बदलाव कर प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
अगर यह फेरबदल होता है तो मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल का राजनीतिक संतुलन काफी बदल सकता है। नए चेहरों को मौका देकर जहां क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत करने की कोशिश होगी, वहीं अनुभवी नेताओं की वापसी से संगठन को मजबूती देने का संदेश भी दिया जा सकता है। अब नजर दिल्ली से मिलने वाली हरी झंडी और संगठन की अंतिम सहमति पर टिकी है।
28 अक्टूबर 2026