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27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, कोर्ट ने कहा- यह अनुभव सीखने वाला रहा

जन प्रकाशन 5 अगस्त 2026
2 मिनट में पढ़ें
27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित, कोर्ट ने कहा- यह अनुभव सीखने वाला रहा

जबलपुर। बुधवार को मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामलों में हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

ढाई घंटे से अधिक चली सुनवाई

करीब ढाई घंटे से अधिक चली सुनवाई में आरक्षण की संवैधानिक वैधता, 50 प्रतिशत की सीमा, ओबीसी की आबादी और आरक्षण लागू करने से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर अंतिम तर्क रखे गए। अब हाई कोर्ट आने वाले दिनों में इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है।

सुनवाई का अनुभव कोर्ट के लिए सीखने वाला रहा

अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने सभी पक्षों के अधिवक्ताओं को उनके द्वारा रखी गई कानूनी दलीलों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरी सुनवाई का अनुभव कोर्ट के लिए भी सीखने वाला रहा। लंबी सुनवाई के दौरान पक्षकारों की ओर से आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रविधानों, पूर्व के न्यायिक निर्णयों और उपलब्ध आंकड़ों का विस्तार से उल्लेख किया गया।

2019 में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत

मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के बाद से यह मामला न्यायिक विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा, ओबीसी की आबादी, पिछड़ेपन के आंकड़े, क्रीमीलेयर और नियुक्तियों में लंबित पदों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस हुई।

ओबीसी की आबादी 51 प्रतिशत

ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बुधवार को अपनी अंतिम दलीलों में 27 प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखने की मांग की थी। उन्होंने तत्कालीन सरकार द्वारा अक्टूबर 2019 में दाखिल 555 पेज के जवाब का हवाला देते हुए कहा था कि उसमें ओबीसी की आबादी 51 प्रतिशत बताई गई थी।

12वीं तक पढ़े विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता

उन्होंने आरक्षण समाप्त करने की स्थिति में सरकारी स्कूलों से कक्षा एक से 12वीं तक पढ़े विद्यार्थियों को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देने का सुझाव भी रखा था।

बहरहाल, अब फैसला सुरक्षित होने के बाद इस मामले से जुड़े अभ्यर्थियों, सरकार और विभिन्न पक्षों की निगाह हाई कोर्ट के निर्णय पर टिक गई है।

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श्रेणियाँ:मध्यप्रदेशजबलपुरराजनीति

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