
नई दिल्ली। तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने 2013 के रेप केस में मिली 10 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों, अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों और तेजपाल के ईमेल व मैसेज को देखते हुए यह सजा पर रोक लगाने का उपयुक्त मामला नहीं है।
यह मामला गोवा के एक लग्जरी होटल की लिफ्ट में अपनी सहकर्मी के साथ कथित दुष्कर्म से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया और 10 साल की सजा सुनाई। तेजपाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लिफ्ट के दरवाजे खुलने और बंद होने से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि विशेषज्ञों के अनुसार कथित घटना के दौरान लिफ्ट के दरवाजे अलग-अलग मंजिलों पर खुले थे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना से पहले पीड़िता के दिए गए लिखित बयानों में रेप का उल्लेख नहीं था।
वहीं, गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध किया। उन्होंने पीड़िता के सहकर्मियों के बयान, तेजपाल का घटना के बाद भेजा गया मैसेज और माफीनामे वाले ईमेल का हवाला दिया। उनका कहना था कि ये साक्ष्य मामले में महत्वपूर्ण हैं और पीड़िता के आरोपों को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं दिखता। अदालत ने तेजपाल की याचिका खारिज कर दी। दूसरी ओर, गोवा सरकार ने भी अपील दायर कर तेजपाल के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की है।
3 नवंबर 2026