
नई दिल्ली। दिवाली पर पटाखे नहीं जलाने की अपील करना अभिनेत्री दीया मिर्जा को भारी पड़ गया। उनके एक जागरूकता वीडियो पर कुछ BJP नेताओं की आपत्तियों और उन्हें 'हिंदू विरोधी' बताए जाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और किसी व्यक्ति के धर्म के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह कौन-सा त्योहार मना सकता है और कौन-सा नहीं। त्योहार सभी के लिए हैं और इनमें हर किसी की भागीदारी का स्वागत होना चाहिए।
दरअसल, दीया मिर्जा ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुरोध पर एक वीडियो बनाया था। इसमें उन्होंने लोगों से सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे नहीं जलाने की अपील की थी। यह वीडियो अदालत के निर्देशों के तहत पर्यावरण और वायु प्रदूषण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। हालांकि, कुछ BJP नेताओं की आपत्ति के बाद BMC ने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया।
जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि किसी दूसरे धर्म से जुड़ा व्यक्ति दिवाली पर जागरूकता का संदेश दे तो इसमें आपत्ति कैसी? जस्टिस गोखले ने कहा कि हर व्यक्ति एक ही हवा में सांस लेता है, फिर पर्यावरण के मुद्दे को धर्म से क्यों जोड़ा जा रहा है? कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखे नहीं जलाने की अपील का मतलब त्योहार मनाने के अधिकार पर रोक लगाना नहीं है।
हाईकोर्ट ने BMC को दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने और लोगों का भरोसा बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर राजनीति या गुटबाजी की जगह नहीं होनी चाहिए। मुंबई जैसे शहर की पहचान आपसी सौहार्द और एकजुटता है। इसे कुछ लोगों की गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।
26 अक्टूबर 2026