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एआई से पढ़ेंगे सरकारी स्कूल के बच्चे, विद्या शक्ति' अभियान के तहत एक नई पहल शुरू, शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण

जन प्रकाशन 6 अगस्त 2026
3 मिनट में पढ़ें
एआई से पढ़ेंगे सरकारी स्कूल के बच्चे, विद्या शक्ति' अभियान के तहत एक नई पहल शुरू, शिक्षकों को दिया प्रशिक्षण

इंदौर। सरकारी स्कूलों की पढ़ाई अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड, किताब और कॉपी तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले समय में शिक्षक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पढ़ाई को बच्चों के लिए ज्यादा आसान, रोचक और समझने लायक बना सकेंगे। इंदौर जिले में इसी सोच के साथ 'विद्या शक्ति' अभियान के तहत एक नई पहल शुरू हुई है। फिलहाल इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई है, लेकिन इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों की पढ़ाई में तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करना है, जिससे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को सीधा लाभमिल सके।

एआई आधारित शिक्षण पद्धति का पायलट प्रोजेक्ट शुरू

इंदौर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक को जोड़ने की दिशा में प्रशासन ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से 'विद्या शक्ति' अभियान के तहत एआई आधारित शिक्षण पद्धति का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसकी शुरुआत कक्षा 6 से 8 तक के विज्ञान और गणित विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण से हुई। बुधवार को बाल विनय मंदिर में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग सरकारी स्कूलों से आए शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

शिक्षकों के लिए अलग-अलग सत्र आयोजित किए

प्रशिक्षण कार्यक्रम में सुबह विज्ञान और दोपहर में गणित के शिक्षकों के लिए अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। हर स्कूल से विज्ञान और गणित के एक-एक शिक्षक को बुलाया गया था, ताकि प्रशिक्षण के बाद वे अपने-अपने विद्यालयों में जाकर सीखी गई तकनीकों का उपयोग कर सकें।

एआई का उपयोग केवल जानकारी खोजने तक सीमित नहीं

प्रशिक्षण के दौरान आईआईटी मद्रास से आए विशेषज्ञों ने शिक्षकों को बताया कि एआई का उपयोग केवल जानकारी खोजने तक सीमित नहीं है। इसकी मदद से शिक्षक अपने विषय के अनुसार लेक्चर प्लान तैयार कर सकते हैं, क्लासवर्क और होमवर्क बना सकते हैं, अभ्यास प्रश्न तैयार कर सकते हैं और विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का विश्लेषण भी आसान तरीके से कर सकते हैं। इससे शिक्षकों का काफी समय बचेगा और वे बच्चों की पढ़ाई और उनकी समझ पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।

दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक भी नई तकनीक का उपयोग हो

प्राचार्य पूजा सक्सेना के अनुसार प्रशिक्षण में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक भी नई तकनीक का उपयोग करके बेहतर शिक्षण सामग्री तैयार कर सकते हैं। इससे संसाधनों की कमी वाले स्कूलों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संभव हो सकेगा।

बच्चों की जरूरत के अनुसार सामग्री तैयार कर सकेंगे शिक्षक

शिक्षक अपनी कक्षा के स्तर और बच्चों की जरूरत के अनुसार सामग्री तैयार कर सकेंगे। इससे हर विद्यार्थी की सीखने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षक अब अपने-अपने विद्यालयों में जाकर एआई आधारित शिक्षण पद्धति का प्रयोग करेंगे। इसके बाद जिला प्रशासन और आईआईटी मद्रास की टीम शिक्षकों से लगातार फीडबैक लेगी। यह देखा जाएगा कि नई तकनीक का उपयोग कक्षाओं में कितना सफल रहा और विद्यार्थियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा।

प्रशिक्षण में दी गई ये जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि विज्ञान और गणित जैसे विषयों में कई ऐसे अध्याय होते हैं जिन्हें केवल किताब या ब्लैकबोर्ड के माध्यम से समझाना कठिन होता है। एआई आधारित टूल्स और डिजिटल तकनीक की मदद से इन्हें एनिमेशन, थ्री-डी माडल और सिमुलेशन के जरिए आसानी से समझाया जा सकता है।

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श्रेणियाँ:मध्यप्रदेशइंदौरटेक्नोलॉजीशिक्षाराजनीति

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