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महिला को गूगल पर अस्पताल का नंबर खोजना पड़ा महंगा, खातों से 3.96 लाख रुपए हुए पार

जन प्रकाशन 21 सितंबर 2026
3 मिनट में पढ़ें
महिला को गूगल पर अस्पताल का नंबर खोजना पड़ा महंगा, खातों से 3.96 लाख रुपए हुए पार

साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी है जागरूकता, ठगी का अहसास हो तो तुरंत 1930 पर संपर्क करें

इंदौर। ऑनलाइन किसी अस्पताल या संस्थान का संपर्क नंबर तलाशना भी अब सावधानी मांगता है। बाणगंगा क्षेत्र की अनीता जैन आंखों के इलाज के लिए राजेश नेत्रालय अस्पताल का नंबर गूगल पर सर्च करने के बाद साइबर ठगी का शिकार हो गईं। सर्च में मिले नंबर पर कॉल करने के बाद ठगों ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और महज 5 रुपए का पेमेंट कराने के बहाने ऐसा जाल बिछाया कि महिला के बैंक खातों से 3.96 लाख रुपए निकल गए। मामले में बाणगंगा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

5 रुपए के पेमेंट से शुरू हुआ ठगी का खेल

पुलिस के मुताबिक, अनीता ने 13 सितंबर को अस्पताल का नंबर गूगल पर खोजा था। सर्च में मिले नंबर पर संपर्क करने पर सामने वाले ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया। आरोपी ने 5 रुपए का पेमेंट करने के लिए दूसरे मोबाइल नंबर से एक लिंक भेजी। लिंक से खुले फॉर्म में महिला ने बैंक संबंधी जानकारी दर्ज कर पेमेंट करने का प्रयास किया, लेकिन ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी ने दूसरे बैंक खाते से दोबारा पेमेंट करने के लिए कहा।

तीन खातों की जानकारी डालते ही बढ़ा खतरा

महिला ने आरोपी के कहने पर दूसरे खाते की जानकारी भी दर्ज कर दी। इस दौरान एसबीआई, आईसीआईसीआई और एक अन्य बैंक खाते से जुड़ी जानकारी इस्तेमाल की गई। 16 सितंबर को उनके एक खाते से 80 हजार और दूसरे खाते से 3.16 लाख रुपए निकल गए। तीसरे खाते से भी रकम ट्रांसफर करने की कोशिश की गई, लेकिन ठग इसमें सफल नहीं हो सके। इसके बाद महिला ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज किया है।

गूगल सर्च, फर्जी लिंक और फर्जी कर्मचारी बनकर ठगी

यह मामला बताता है कि साइबर ठग अब केवल बैंक अधिकारी बनकर ही नहीं, बल्कि अस्पताल, कंपनी, कस्टमर केयर या अन्य संस्थानों के कर्मचारी बनकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी कॉल, फिशिंग लिंक, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, यूपीआई फ्रॉड, फर्जी निवेश और नौकरी के नाम पर ठगी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर विशिंग, स्मिशिंग, फिशिंग, सिम स्वैप, कार्ड फ्रॉड और पहचान चोरी जैसी धोखाधड़ी को भी साइबर अपराध की श्रेणियों में बताया गया है।

सतर्क रहें, एक क्लिक से पहले सौ बार सोचें

साइबर सुरक्षा के जानकारों और सरकारी जागरूकता अभियानों का मूल संदेश साफ है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, फोन पर बैंकिंग जानकारी बताने या किसी के कहने पर ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी पुष्टि करें। ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी, नेट बैंकिंग पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। आरबीआई भी डिजिटल लेनदेन में ऐसे महत्वपूर्ण विवरण साझा नहीं करने और संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की सलाह देता है।

ठगी हो तो तुरंत 1930 पर सूचना दें

अगर खाते से पैसे निकल गए हैं तो घबराने या देरी करने के बजाय तुरंत बैंक को सूचना देने के साथ साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करना जरूरी है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन उपलब्ध है।

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श्रेणियाँ:मध्यप्रदेशइंदौरटेक्नोलॉजीराजनीति

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