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सफाईकर्मियों की हड़ताल से बेहाल भोपाल, सड़कों पर लगे कचरे के ढेर

जन प्रकाशन 5 नवंबर 2026
3 मिनट में पढ़ें
सफाईकर्मियों की हड़ताल से बेहाल भोपाल, सड़कों पर लगे कचरे के ढेर

800 से ज्यादा कचरा गाड़ियां थमीं, घरों से कचरा उठना बंद;

दो दिन में जमा हुआ 2100 टन कचरा, दिवाली से पहले बढ़ी मुश्किलें

भोपाल। त्योहार की तैयारियों के बीच राजधानी भोपाल की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। नगर निगम के सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। घरों से कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचने के कारण कॉलोनियों, बाजारों और मुख्य सड़कों के आसपास कचरे के ढेर नजर आने लगे हैं। शहर के कई इलाकों में लोगों को खुद ही कचरे का निपटान करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि 800 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी हैं और सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की नगर निगम की कोशिशें भी नाकाफी साबित हो रही हैं।

नियमित नौकरी और बेहतर वेतन के लिए आंदोलन

सफाईकर्मी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी का नियमितीकरण, वेतन में बढ़ोतरी, ठेका प्रथा खत्म करना और कर्मचारियों को जरूरी सुविधाएं देना शामिल है। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसका खामियाजा अब शहर के रहवासियों को भुगतना पड़ रहा है। घरों में कचरा जमा होने के साथ ही सड़क किनारे और खाली प्लॉटों में भी गंदगी बढ़ने लगी है।

85 वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित

मंगलवार और बुधवार को शहर के सभी 85 वार्डों में कचरा संग्रहण व्यवस्था प्रभावित रही। दो दिनों में करीब 2100 टन कचरा जमा होने की जानकारी सामने आई है। इस बीच बुधवार शाम मंत्रालय में अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग पर फैसला होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में गुरुवार को भी शहर में कचरा उठाने की व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी।

वैकल्पिक इंतजाम भी नहीं आए काम

हड़ताल के असर को कम करने के लिए नगर निगम ने करीब 900 आउटसोर्स कर्मचारियों की मदद से सफाई व्यवस्था संभालने की कोशिश की, लेकिन इतने कर्मचारियों से पूरे शहर की व्यवस्था को संभालना मुश्किल साबित हुआ। कई जगह वैकल्पिक सफाई व्यवस्था का विरोध भी देखने को मिला। न्यू मार्केट जैसे प्रमुख बाजार में व्यापारियों को खुद सफाई के लिए झाड़ू उठानी पड़ी। वहीं बैरागढ़, चौक बाजार, बिट्टन मार्केट और कोलार रोड सहित कई क्षेत्रों में कचरा जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

दिवाली से पहले बढ़ी चिंता

धनतेरस और दिवाली के चलते बाजारों में पहले से ही भीड़ और गतिविधियां बढ़ रही हैं। ऐसे समय में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। यदि जल्द ही हड़ताल खत्म नहीं हुई तो त्योहार के दौरान शहर में गंदगी की समस्या और गंभीर हो सकती है। अब देखना होगा कि नगर निगम और सरकार कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं और शहर की सफाई व्यवस्था कब तक सामान्य हो पाती है।

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श्रेणियाँ:मध्यप्रदेशभोपालराजनीति

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