
नई दिल्ली। IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया ने बड़ा कदम पार कर लिया है। सरकार ने बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये बताया गया है। इस सौदे के पूरा होने के बाद बैंक के स्वामित्व और प्रबंधन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। रणनीतिक खरीदार को बैंक के प्रबंधन का नियंत्रण मिलेगा, जबकि केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
IDBI बैंक में केंद्र सरकार और LIC की बड़ी हिस्सेदारी है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और LIC अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इस तरह कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी रणनीतिक खरीदार को हस्तांतरित होगी। यह सौदा बैंक के भविष्य के संचालन और कारोबारी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस सौदे की खास बात यह है कि खरीदार को केवल हिस्सेदारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि बैंक के प्रबंधन पर भी नियंत्रण हासिल होगा। सरकार का मानना है कि रणनीतिक निवेशक के आने से बैंक को नई पूंजी मिल सकती है और उसके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, बैंक की कार्यप्रणाली और सेवाओं में किस तरह के बदलाव होंगे, यह सौदा पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
IDBI बैंक के निजीकरण के बाद ग्राहकों की नजर बैंक की ब्याज दरों, सेवा शुल्क, शाखाओं और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं पर रहेगी। फिलहाल, केवल हिस्सेदारी बिक्री के फैसले के आधार पर ग्राहकों की सेवाओं में किसी बदलाव का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। बैंक की ओर से भविष्य में लिए जाने वाले फैसले ही यह तय करेंगे कि आम ग्राहकों को इसका क्या असर महसूस होगा।
बैंक के रणनीतिक विनिवेश के लिए दो चरणों में बोली प्रक्रिया अपनाई गई। इस दौरान विभिन्न सरकारी समूहों और अधिकृत समितियों ने प्रक्रिया की समीक्षा की। बोली लगाने वाली कंपनियों ने बैंक का मूल्यांकन कर अपनी पेशकश दी। स्वतंत्र एजेंसियों के मूल्यांकन को भी प्रस्तावित कीमत की उचितता जांचने के लिए आधार बनाया गया।
सरकार इस सौदे को वित्तीय सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसर के रूप में देख रही है। रणनीतिक भागीदार के आने से बैंक की विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। अब इस पूरी प्रक्रिया में आगे की औपचारिकताओं और सौदे के अंतिम रूप पर नजर रहेगी। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन में बदलाव के दौरान बैंक के ग्राहकों के हितों और सेवाओं की निरंतरता को किस तरह बनाए रखा जाता है।
26 अक्टूबर 2026