
नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के बदलते हालात के बीच संगठन की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ खड़ा मंच नहीं है, बल्कि सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ने का माध्यम है। मोदी ने कहा कि दुनिया का भविष्य साझा है, इसलिए उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS देशों के संयुक्त बयान पर सहमति बनना अहम माना जा रहा है। ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख के बावजूद सदस्य देशों ने साझा बयान जारी करने पर सहमति जताई। भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए इन मतभेदों को दूर करने तथा आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही संगठन में लिए गए फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत करना होगा।
मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे तेजी से उभरते क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके लिए बनाए जाने वाले वैश्विक नियमों में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने भविष्य की चुनौतियों के लिए युवाओं को तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत, कूटनीति और कानून से जुड़ी ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक नेतृत्व में युवाओं की भूमिका और बढ़ेगी।
मोदी ने संकट में फंसे नाविकों की मदद के लिए देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा। इस नेटवर्क के जरिए नाविकों को जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। भारत मंडपम में सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की शनिवार शाम द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है, जिस पर भारत-चीन संबंधों के लिहाज से सभी की नजर रहेगी।
26 अक्टूबर 2026