
नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन को लेकर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल उठाया कि जब कोर्ट पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा चुका था, तो एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोबारा नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों समझी। मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
मामले के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी पर आरोप था कि वह विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के धरने में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था और सरकार विरोधी बातें फैला रहा था।
पुलिस रिपोर्ट के आधार पर मजिस्ट्रेट ने BNSS की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की थी। छात्र से 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और 5-5 लाख रुपये की दो जमानतें भरने को लेकर जवाब मांगा गया था। हालांकि, बाद में नोटिस वापस लिए जाने की बात सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वजीत भट्टाचार्य ने कार्रवाई को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह के नोटिस से छात्रों के बीच डर पैदा हो सकता है। उन्होंने अदालत के सामने मामले की गंभीरता रखी।
इस पर CJI ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा, "मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?" कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश के बावजूद कोई मजिस्ट्रेट इस तरह की कार्रवाई नहीं कर सकता।
पीठ ने वकील से नोटिस को याचिका के जरिए रिकॉर्ड पर लाने को कहा। साथ ही संकेत दिया कि पूरे मामले में संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
26 अक्टूबर 2026