
नई दिल्ली। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद भयावह बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
आपदा से नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। करीब 933 कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। आशंका है कि इनमें कई लोग परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हो सकते हैं। बचाव दल मलबा हटाकर और आधुनिक उपकरणों की मदद से उनकी तलाश कर रहे हैं।
नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षाबलों को तैनात किया है। करीब 21 हजार सुरक्षाकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। दुर्गम इलाकों में हेलिकॉप्टर के जरिए भी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
नेपाल की मुश्किल घड़ी में भारत लगातार मदद पहुंचा रहा है। भारत से 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान नेपाल रवाना हुई है। इसमें बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरण, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। भारत की ओर से अब तक बड़ी मात्रा में मानवीय सहायता नेपाल भेजी जा चुकी है।
भारत ने राहत सामग्री के साथ विशेषज्ञ टीमों की भी मदद उपलब्ध कराई है। सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, चिकित्सा सहायता और शवों की पहचान के लिए विशेषज्ञों को लगाया गया है। डीएनए जांच से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। नेपाल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
26 अक्टूबर 2026