
नई दिल्ली। आज का दिन भारत के रेल इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रफ्तार भरने से पहले इस आधुनिक ट्रेन का ट्रायल सफलता पूर्वक पूरा हो चुका है। इस बीच ट्रेन के अंदर की तस्वीरें और लुक भी सामने आ गया है, जिसे लेकर यात्रियों में काफी उत्साह है। यह ट्रेन न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यात्रियों के सफर को बेहद आरामदायक बनाने के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के अंदरूनी हिस्से (इंटीरियर) को बेहद आधुनिक और आकर्षक लुक दिया गया है। सफर के दौरान यात्रियों की सहूलियत के लिए ट्रेन में
अनेक सुविधाएं दी गई हैं। ट्रेन के अंदर बैठने के लिए प्रीमियम क्वालिटी की बेहद आरामदायक और एर्गोनोमिक (शरीर के अनुकूल) लग्जरी सीटें लगाई गई हैं, ताकि लंबे सफर में भी यात्रियों को थकान न हो।
डिजिटल युग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन की सीटों के पास मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स को चार्ज करने के लिए विशेष चार्जिंग सॉकेट्स की सुविधा दी गई है।
8 यात्री कोच वाली इस ट्रेन की कुल क्षमता 2600 यात्रियों की है। यह दुनिया की सबसे ज्यादा यात्री क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन बन गई है, क्योंकि वर्तमान में विदेशों में चलने वाली ऐसी ट्रेनें महज 2 से 4 कोच की ही हैं।
जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। 10 कोच वाले इस ब्रॉडगेज ट्रेनसेट में 2 ड्राइविंग पावर कोच और 8 पैसेंजर कोच शामिल हैं। अपनी यात्रा के दौरान यह ट्रेन जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भांबेवा, ईशापुर खेरी, बुटाना, खंदराय, गोहाना, राभड़ा, लाठ, मोहना और बड़वासनी सहित कुल 12 स्टेशनों पर ठहराव करेगी। इसके पहले सफर को यादगार बनाने के लिए उद्घाटन के दिन यात्रा करने हेतु 50 स्कूली बच्चों का चयन भी किया गया है।
यात्रियों को लग्जरी सुविधाएं देने के साथ-साथ यह ट्रेन भारतीय रेलवे के 'नेट जीरो कार्बन' मिशन में भी बड़ी भूमिका निभाएगी। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने के कारण इस ट्रेन से बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होगा, क्योंकि साइलेंसर से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप (वाटर वेपर) निकलेगी। सुरक्षा के लिहाज से जींद में विशेष हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है, जिसे पेट्रोलियम और एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से कंप्रेस्ड गैस वितरण का लाइसेंस मिला है। ट्रेन में किसी भी तरह के गैस लीकेज पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक सेंसर्स और एक समर्पित निगरानी टीम चौबीसों घंटे तैनात रहेगी।
26 अक्टूबर 2026