
रायपुर। पेट्रोल में एथेनॉल मिक्सिंग की पूरे देश में चर्चा हो रही हैं। केंद्र सरकार इसके फायदे गिना रही है तो दूसरी ओर इससे गाड़ियों में पड़ने वाले कथित नकारात्मक असर को लेकर आम वाहन मालिक के मन में कई सवाल हैं। इस बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से उपभोक्ता अधिकार के संबंध में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। यहां एथेनॉल मिले पेट्रोल की वजह से डॉक्टर की कार में आई खराबी को लेकर उपभोक्ता आयोग ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी पर बड़ा जुर्माना लगाया है।
जानकारी के अनुसार, पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को लेकर चर्चाओं के बीच रायपुर निवासी डॉ प्रेमराज देब्ता ने 3 जून 2024 को मारुति सुजुकी की एक कार Nexa डीलरशिप से खरीदी थी। कार खरीदने के कुछ समय बाद ही वह अचानक बंद होने लगी। जब कार को सर्विस सेंटर ले जाया गया, तो वहां बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट है।
बार-बार गाड़ी बंद होने और सर्विस सेंटर के चक्कर काटने से परेशान होकर कार मालिक ने जब सरकारी लैब में पेट्रोल की जांच करवाई, तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि पेट्रोल टैंक में सफेद दही जैसा जमा हुआ पदार्थ दरअसल 'इथेनॉल' था।
ऐसे में गाड़ी मालिक तुरंत कार डीलरशिप के पास पहुंचे और उन्हें पूरी जानकारी दी तो इस खराबी की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, तो डॉ प्रेमराज ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप था, "कार बेचते समय कंपनी या डीलर ने उन यह नहीं बताया कि इस कार का इंजन 20% इथेनॉल मिले पेट्रोल (E20) से चलने के लिए तैयार नहीं है।"
कार मालिक ने कहा कि अगर कार का इंजन इस नए ईंधन के अनुकूल नहीं था तो बिक्री के समय उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए थी, जो कि नहीं दी गई। मामले में कार विक्रेता (नेक्सा मैग्नेटो स्काई ऑटोमोबाइल्स) और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड को पार्टी बनाया गया था। डीलरशिप के मैनेजर ने कोर्ट में अपनी सफाई देते हुए कहा, “गाड़ी में खराबी पेट्रोल की खराब क्वालिटी के कारण आई है, जो कि एक बाहरी कारण है।"
कंपनी की पॉलिसी के मुताबिक, अगर बाहरी वजहों से गाड़ी में कोई खराबी आती है, तो वह वॉरंटी के दायरे में नहीं आती। उन्होंने एक प्राइवेट लैब की रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें ईंधन की गुणवत्ता को खराब बताया गया था। उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद माना कि डॉ प्रेमर देब्ता की कार जनवरी 2023 में बनी थी और उसक इंजन आधुनिक E20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं था।
उपभोक्ता आयोग ने इसे 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) माना और मारुति सुजुकी को कड़े निर्देश दिए है। आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसे उसी मॉडल की बिल्कुल नई E20 ईंधन के अनुकूल वाली कार देनी होगी।
इतना ही नहीं, अगर कंपनी 45 दिनों के भीतर कार नहीं दे पाती है, तो उसे कार की कीमत, आरटीओ का चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम के साथ 20,50,494 रुपये देने होंगे। इसके अलावा उपभोक्ता आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए भी 1 लाख रुपये और अदालती मुकदमे के खर्चे के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने होंगे।
26 अक्टूबर 2026