नई दिल्ली। भारत भर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका ल्यूक क्रिस्टोफर काउंटिन्हो ने दायर की है। क्रिस्टोफर का कहना है कि देश में वायु प्रदूषण का स्तर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के अनुपात में पहुंच गया है। जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
22 लाख स्कूली बच्चों के फेफड़ों पर असर
याचिका में यह भी कहा गया है कि अकेले दिल्ली में करीब 22 लाख स्कूली बच्चों को फेफड़ों में इतना नुकसान हो चुका है कि उनकी रिकवरी मुश्किल है। इसकी पुष्टि सरकारी और मेडिकल स्टडी से भी हुई है। पॉलिसी बनने के बावजूद, ग्रामीण और शहरी भारत के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। कई मामलों में तो और भी बदतर है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु में PM 2.5
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु में PM 2.5 और PM10 जैसे प्रदूषक सीमाओं से ज्यादा है। PM 2.5 का एनुअल एवरेज 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। इसके उलट दिल