
भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून ने इस बार भले ही देरी से दस्तक दी, लेकिन बाद के दिनों में बारिश ने रफ्तार पकड़ ली। प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 86 प्रतिशत कोटा पूरा हो चुका है। 55 में से 16 जिलों में बारिश सामान्य से 100 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज की गई है, जबकि 34 जिले अभी भी औसत से पीछे चल रहे हैं। इंदौर संभाग में बारिश का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है।
प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। इन जिलों में मानसून ने औसत बारिश की भरपाई कर दी है।
खरगोन, मंडला, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, आगर-मालवा और अनूपपुर में 90 से 99 प्रतिशत तक बारिश हो चुकी है। मौसम का एक-दो मजबूत सिस्टम इन जिलों में सक्रिय होता है तो यहां भी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। अभी 17 दिन बाकी हैं। ऐसे में बारिश के आगामी दौर प्रदेश के आंकड़ों को और बेहतर कर सकते हैं। अक्टूबर में होने वाली बारिश को मानसूनी बारिश के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता।
लगातार बारिश का असर प्रदेश के बड़े जलाशयों में भी दिखाई दे रहा है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर फुल टैंक लेवल तक पहुंचने के बाद भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोलने पड़े। बरगी, बाणसागर और गोपीकृष्ण समेत कई जलाशयों में भी पर्याप्त पानी पहुंच चुका है।
इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाणसागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर, जौहिला और कुंडालिया सहित कई बांधों में 90 प्रतिशत या उससे अधिक जलभराव दर्ज किया गया है। वहीं नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है।
इस बार मध्यप्रदेश में मानसून 24 जून को पहुंचा था, जो सामान्य समय से नौ दिन देर था। हालांकि इसके बाद मानसून ने तेजी दिखाई और अगले नौ दिनों में पूरे प्रदेश में फैल गया। जून में बारिश सामान्य से 30 प्रतिशत कम रही थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह तक आंकड़ा सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक हो गया। अगस्त के दूसरे सप्ताह से शुरू हुआ भारी बारिश का दौर सितंबर में भी बना हुआ है। आने वाले दिनों में पश्चिमी मध्यप्रदेश में तेज बारिश की संभावना जताई गई है।
7 अक्टूबर 2026