
इंदौर। मानसून की बेरुखी ने मध्यप्रदेश के कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है। सामान्य से कम बारिश के चलते इंदौर सहित प्रदेश के 12 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। बारिश की कमी का असर खेती, मिट्टी में नमी और जल स्रोतों की उपलब्धता पर पड़ने की आशंका है। खासकर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कम वर्षा के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बारिश की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में अलीराजपुर शामिल है, जहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। रतलाम सहित अन्य जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे रहा है। लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार, खेतों में नमी और आगामी रबी सीजन के लिए सिंचाई की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
कम बारिश का असर केवल खरीफ फसलों तक सीमित नहीं है। भूजल स्तर, तालाबों और अन्य जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का सर्वे, जल स्रोतों की निगरानी और जरूरत के अनुसार राहत उपाय महत्वपूर्ण होंगे। किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए समय पर आकलन और सहायता की व्यवस्था भी जरूरी है।
इंदौर के अलावा अलीराजपुर, रतलाम, उज्जैन, धार, झाबुआ, शाजापुर, पांढुर्ना, बैतूल, हरदा और नर्मदापुरम के नाम प्रभावित जिलों की सूची में बताए गए हैं। बारिश की कमी के बीच इन क्षेत्रों में कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े कदमों पर नजर रहेगी। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में आगे की रणनीति तय करने के लिए वास्तविक फसल नुकसान, जल स्रोतों की स्थिति और स्थानीय जरूरतों का आकलन अहम होगा।
28 सितंबर 2026