RSS का केंद्र को सुझाव, अगले बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हो फोकस

आरएसएस, थिंक टैंक आदि ने सरकार से आगामी केंद्रीय बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस करने का आग्रह किया है। इस मामले से जानकार तीन लोगों ने यह हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया। माना जा रहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने से आर्थिक मंदी को दूर करने में मदद मिल सकती है। लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आरएसएस का कहना है कि न तो यह सिर्फ इकॉनमी को बूस्ट करने का सबसे बेहतर तरीका है, बल्कि राजनैतिक रूप से भी मददगार होगा।

सरकार ने बजट को लेकर अपने आंतरिक और बाहरी हितधारकों के साथ परामर्श भी शुरू कर दिया है। जून में समाप्त हुए तीन महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था पिछली 25 तिमाही में सबसे धीमी गति से बढ़ी है जोकि 5% थी। भारतीय स्टेट बैंक ने 2019-20 में अनुमानित विकास दर को 6.1% से घटाते हुए 5 फीसदी कर दिया था। वहीं, मूडीज इंवेस्टर्स ने भी 5.8% से घटाकर 5.6% कर दिया है।

एचटी के अनुसार, आरएसएस ने पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक करके यह मुद्दा उनके सामने उठाया है। एक शख्स ने कहा कि संघ का नजरिया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने से वैश्विक मंदी का असर भारत पर कम होगा।

इस वर्ष की शुरुआत में संघ और उसके सहयोगियों ने सीतारमण की ‘गांव, गरीब और किसान’ नीति वाले बजट घोषणा (5 जुलाई को) की सराहना की थी। सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा था कि एफीडीआई में हिस्सेदारी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद ही होगी जिसको लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने मांग की है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जमीनी फीडबैक के आधार पर, संघ के सहयोगियों ने सुझाव दिया है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए इंसेंटिव होना चाहिए। इसके अलावा कर्जमाफी जैसी त्वरित व्यवस्थाओं के बजाय, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत कार्य होने चाहिए।

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