NDA से अलग हुए इस दल ने यूपी की सात सीटों पर कांग्रेस को छोड़ा पीछे

एनडीए से अलग हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने अलग होने के बाद अपना प्रभाव पूर्वांचल की कई सीटों पर छोड़ा है। चुनाव से ठीक पहले भाजपा से बगावत कर उतरी सुभासपा सात सीटों पर तीसरा स्थान बनाने में कामयाब रही। यहां तक कि देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस को इन सभी सीटों पर पछाड़ दिया है। सलेमपुर में कांग्रेस प्रत्याशी व वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा सुभासपा के वोटों मे सेंध नहीं लग पाए और चौथे स्थान पर रहे।

पूर्वांचल के राजभर समाज पर दावा कर सुभासपा पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन करने में सफल रही। इसी का नतीजा था कि गठबंधन में पार्टी को पूर्वांचल में आठ सीटें मिलीं। इसमें वाराणसी के अजगरा, गाजीपुर के जहूराबाद व जखनियां और कुशीनगर के रामकोला विधानसभा सीट भी जीती। सुभासपा मुखिया ओमप्रकाश राजभर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में बात नहीं बनी तो सुभासपा ने पूर्वांचल के 22 सीटों पर प्रत्याशी उतारे और भाजपा का समीकरण बिगाड़ने का दावा कर चुनाव प्रचार में जुटी थी। देखा जाए तो कुछ सीटों पर वह अपने लक्ष्य में कामयाब भी दिखी।

पार्टी के महासचिव शशिप्रताप सिंह का दावा करते हैं कि घोसी, गाजीपुर, मछलीशहर और चंदौली में सुभासपा की वजह से भाजपा का वोट बैंक बिगड़ा है। घोसी और गाजीपुर भाजपा के खाते से बाहर हो गयी तो मछलीशहर और चंदौली में जीत का अंतर कम हो गया। हालांकि पार्टी इस बात से सबसे ज्यादा खुश नजर आ रही है कि वह आधा दर्जन से अधिक सीटों पर कांग्रेस को पछाड़ कर तीसरा स्थान बनाकर ताकत दिखायी है। जौनपुर में पार्टी पांचवें स्थान रही थी।

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