INX मीडिया केस: चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से इन शर्तों के साथ मिली जमानत, 106 दिन बाद जेल से आएंगे बाहर

सुप्रीम कोर्ट आईएनएक्स मीडिया से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने चिदंबरम को जमानत दे दी है और इस फैसले के साथ वह 106 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम को दो लाख रुपये के मुचलके और दो जमानती के जमानत पर बले दी है। कोर्ट ने कहा है कि वह अनुमति विदेश यात्रा नहीं कर सकते।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ चिदंबरम को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने दो लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के दो मुचलकों पर जमानत देने का निर्णय लिया। कांग्रेस नेता अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे, साथ ही वह न तो किसी गवाह से बात करेंगे, न ही इस मामले में कोई सार्वजनिक टिप्पणी करेंगे, न कोई साक्षात्कार देंगे। आपको बता दें कि चिदंबरम को जेल में 106 दिन से इस मामले में पहले उन्हें सीबीआई की हिरासत में रखा गया था और बाद में ईडी की हिरासत में रखा गया। चिदंबरम को 21 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया गया था।

ईडी ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया है कि वह जेल में रहते हुए भी मामले के अहम गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं। ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं, क्योंकि वे न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि व्यवस्था में लोगों के यकीन को भी ठेस पहुंचाते हैं।

उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान ईडी को बैंक के 12 ऐसे खातों के बारे में पता चला, जिनमें अपराध से जुटाया गया धन जमा किया गया। एजेंसी के पास अलग-अलग देशों में खरीदी गयी 12 संपत्तियों के ब्यौरे भी हैं। उन्होंने दलील दी थी कि जेल में अभियुक्तों की समयावधि को जमानत मंजूर करने का आधार नहीं बनना चाहिए। चिदम्बरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की थी। श्री सिब्बल ने अपनी दलील में कहा था कि रिमांड अजीर् में ईडी ने आरोप लगाया है कि चिंदबरम गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, जबकि वह तो ईडी की हिरासत में थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम की जमानत मंजूर नहीं की गयी मानो वह रंगा-बिल्ला हों।

सिब्बल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि हाईकोर्ट ने ईडी की तीनों बड़ी दलीलें (सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका, फ्लाइट रिस्क, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका) को ठुकरा दिया, लेकिन यह कहते हुए जमानत मंजूर करने से इन्कार कर दिया कि चिंदबरम गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्हें इस घोटाले का सरगना साबित कर दिया गया, जबकि उनसे जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं है। चिदम्बरम ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 15 नवंबर को जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री को सीबीआई ने गत 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को जमानत दे दी थी। इसी बीच, सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 16 अक्टूबर को चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया था। सीबीआई ने 15 मई 2017 को दर्ज मामले में आरोप लगाया था कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेश से 305 करोड़ रुपये का धन प्राप्त करने की मंजूरी देने में अनियमितताएं हुईं थीं। इस प्राथमिकी के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज किया था। उच्च न्यायालय ने पूर्व वित्त मंत्री को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा था कि आर्थिक अपराध के मामले में उन्हें जमानत दिये जाने से जनता में गलत संदेश जायेगा।

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