मुस्लिम समूह के दावे को अयोध्या DM ने किया खारिज, कहा- राम जन्मभूमि में कोई कब्रगाह नहीं

क्या अयोध्या में राम जन्मभूमि मुस्लिम कब्रगाह पर बनाया जाएगा? इसे लेकर मुस्लिम पक्षों ने जो दावा किया है, उस पर जिला प्रशासन का खंडन आया है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जिला प्रशासन ने कहा कि जहां राम मंदिर का निर्माण होना है, वहां 67 एकड़ वाले राजजन्मभूमि के दायरे में कोई कब्रगाह नहीं है। दरअसल, जिला प्रशासन का यह जवाब उस पत्र के बाद आया है, जिसमें अयोध्या के एक मुस्लिम निवासियों के समूह ने मंदिर ट्रस्ट को पत्र भेजते हुए कहा था कि मुस्लिम के कब्रगाह पर राम मंदिर का बनाया जाना यह एक ‘सनातन धर्म’ का उल्लंघन होगा। अयोध्या जमीन विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील रहे एम.आर. शमशाद की तरफ से यह पत्र भेजा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील एमआर शमशाद ने 15 फरवरी को अयोध्या के नौ मुस्लिमों की ओर से नवगठित श्री राम जामभूमि तीर्थक्षेत्र के न्यासी बोर्ड को लिख कर आग्रह किया कि ट्रस्ट राम जन्मभूमि परिसर के 67 एकड़ के दायरे में से चार से पांच एकड़ जमीन छोड़ दे, क्योंकि इसमें एक मुस्लिम कब्रिस्तान था।

अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा ने कहा, ‘वर्तमान में राम जन्मभूमि के 67 एकड़ कैंपस के दायरे में कोई कब्रगाह नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं।’ बता दें कि 15 फरवरी को भेजे गए पत्र में यह कहा गया ता कि जिस जगह पर बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी वहां पर एक कब्रगाह है, जहां पर 1885 में अयोध्या में दंगा के दौरान उन लोगों को दफनाया गया था।

झा ने आगे कहा कि अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को सभी मामलों से अवगत कराया गया था, जिनमें यह पत्र  (वकील एमआर शमशाद द्वारा लिखित)  भी शामिल था। सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट  (9 नवंबर, 2019 को) में भी इन सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख है।

इस पत्र पर आगे कहा गया था- ‘रिकॉर्डेट फैक्ट्स के मुताबिक, 1885 दंगे में 75 मुसलमानों की हत्या की गई और मस्जिद के बाद एक कब्रगाह है, जहां पर उन शवों को दफनाया गया। हालांकि, उसके बाद इस जमीन का इस्तेमाल कब्रगाह के तौर पर होता रहा है।’ पत्र में कहा गया है- ‘केन्द्र सरकार ने भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिमों के कब्रगाह को कोई मुद्दा नहीं माना है। यह ‘धर्म’ का उल्लंघन है।’

यह पत्र सुप्रीम कोर्ट के वकील के. पराशरण और अन्य ट्रस्टी को संबोधित करते हुए लिखा गया है। पराशरण ट्रस्ट की अगुवाई कर रहे हैं। उनसे कहा गया है कि इस बात पर को देखें कि क्या राम मंदिर के लिए मुस्लिम कब्रगाह स्वीकार्य है।’

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