भारत-नेपाल सीमा पर प्यास बुझाने के लिए 18 किलोमीटर की ‘परेड’ कर रहे जवान

भारत-नेपाल सीमा की रखवाली में जुटे सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को प्यास बुझाने के लिए हर दिन 18 किलोमीटर की फेरी लगानी पड़ रही है। पीने के पानी के लिए परेशानी झेल रहे जवानों को रोजाना यह कवायद करते देखा जा सकता है। वाहन में टंकियां और जार लादकर दूरदराज से पानी ढोकर लाते हैं। भीषण गर्मी और यह मुश्किल हालात भी हालांकि जवानों के हौसले के आगे नतमस्तक हो चले हैं।

उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिले बहराइच से करीब 70-72 किलोमीटर दूर संतलिया, जानकी और मलौनापुरवा में एसएसबी के बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) हैं। यहां तैनात जवानों के लिए पेयजल की समस्या एकसमान है। जानकी गांव और मलौनापुरवा के बीओपी पर 10-10 जवान तैनात हैं तो वहीं समतललिया बीओपी हेडक्वार्टर पर 30 जवानों की तैनाती है। ये जवान प्यास बुझाने के लिए हर दिन नौ किलोमीटर दूर श्रावस्ती के जमुनहा जाते हैं। वहां से टंकी और जारों में पानी भरकर पिकअप में लादकर वापस आते हैं। गर्मी के चलते बीओपी के इंडिया मार्का हैंडपंप सूख चुके हैं या गंदा पानी दे रहे हैं। इसके चलते प्यास बुझाने के लिए हर रोज 18 किलोमीटर की यह परेड एसएसबी के जवानों की मजबूरी बन गई है।

महाराष्ट्र के लातूर सरीखा जल संकट सीमावर्ती नवाबगंज ब्लॉक के कई गांवों में है। यहां कुएं, तालाब के साथ ही बड़ी संख्या में इंडिया मार्का हैंडपंप भी सूख चुके हैं। होलिया, लक्ष्मनपुर लसोरवा, गंगापुर गुलहरिया व नवाबगंज का यही हाल है। यहां के शाकिर, अकबर अली, मेराज अहमद, अर्जुन व समीर बताते हैं कि जलस्तर घट जाने से नल पानी नहीं दे रहे हैं, दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।

एन दुर्जे, कमांडर, बीओपी हेडक्वार्टर

संतलिया ने बताया कि बीओपी पर लगे हैंडपंपों से कीचड़य़ुक्त पानी निकल रहा है। जवान नौ किलोमीटर दूर जमुनहा बाजार से पानी लाकर इस्तेमाल करते हैं। बहरहाल, भीषण गर्मी और पेयजल की किल्लत के बावजूद जवानों के हौसले में रत्तीभर भी कमी नहीं आई है। पानी की किल्लत को भी एक चुनौती मान वह इसका हंसते हुए सामना कर रहे हैं। पानी का इंतजाम करने के बाद, कम पानी से गुजारा करते हुए भी हर जवान अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहता है। यही इनका जज्बा है।

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