पाकिस्तान की साहीवाल अब भारत में होंगी पैदा, जानें कितना देती हैं दूध

किसानों की आय दोगुनी करने में अहम योगदान देने और प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने कदम बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों ने डेढ़ साल की कोशिशों के बाद देसी साहीवाल नस्ल के भ्रूण प्रत्यारोपण में सफलता हासिल कर ली है। इस तकनीक से पहली बछिया अक्तूबर में पैदा होगी। यानी महज तीन से चार लीटर दूध देने वाली देसी गायें अब सरोगेसी के माध्यम से 20 लीटर तक दूध देने वाली साहीवाल को भी पैदा कर सकेंगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक देश में नॉन क्रिरप्टेड देसी गायों (जिनकी नस्ल का पता न हो) को हटाकर साहीवाल नस्ल को बढ़ावा देने की मुहिम में मील का पत्थर साबित होगा।

आईवीआरआई के निदेशक डॉ. राजकुमार सिंह ने बताया कि संस्थान में भ्रूण प्रत्यारोपण पर काम 2018 में शुरू किया गया। वैज्ञानिकों ने उन्नत नस्ल की साहीवाल गाय के अंडाणु और सांड़  के शुक्राणु से प्रयोगशाला में भ्रूण तैयार किए। प्रयोगशाला में एक बार में 4 से 8 भ्रूण तैयार कर इसमें से सबसे बेहतर भ्रूण को वृंदावन की गाय में प्रत्यारोपित किया गया। 12 गायों में भ्रूण प्रत्यारोपित किए गए और इसमें से चार सफल हैं।

पहला बच्चा अक्तूबर में पैदा होगा। आईवीआरआई एनिमल जेनेटिक्स विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि यह तकनीक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए काफी प्रभावी साबित होगी। उन्होंने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान की मदद से उन्नत नस्ल वाली गायें तैयार करने में सात जेनरेशन का वक्त लगेगा पर भ्रूण प्रत्यारोपण से पहली ही ब्यांत में साहीवाल सहित अन्य शिखर उत्पादन वाले बच्चे हो सकते हैं। प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एनिमल रिप्रोडक्शन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. बृजेश कुमार बताते हैं कि इस तकनीक से ऐसी गायें, जिनकी नस्ल का पता नहीं है, उनसे शिखर उत्पादन वाली बछड़े ले सकते हैं।
डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि प्रयोगशाला में भ्रूण तैयार होने के सातवें दिन इसे नॉन क्रिरप्टेड नस्ल की गायों में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। होने वाले बच्चे में अपने मां-बाप के जीन होंगे।

दुधारू नस्ल की गायों को बढ़ाने की तैयारी
डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि भारत में दुधारु नस्ल की कई प्रजातियां हैं। इनमें साहीवाल, गिर, लाल सिंधी, कांकरेज, राठी और थारपारकर शामिल हैं। यह 20 से 24 लीटर प्रतिदिन तक दूध देती हैं। एक साल के लैक्टेशन पीरीयड में यह 4000 लीटर तक दूध दे देती हैं। वहीं ऐसी गायें, जिनकी नस्ल का पता नहीं है, वे रोजाना 3-4 लीटर ही दूध देती हैं। भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से काफी कम समय में ही नॉन क्रिरप्टेड गायों को रिप्लेस कर दुधारू नस्ल की गायें तैयार हो जाएंगी।

आईवीआरआई ने भ्रूण प्रत्यारोपण में सफलता हासिल की है। इससे अच्छी नस्ल के बच्चे होंगे। इनमें अपने मां-बाप के गुण होंगे। किसानों के पास कम दूध देने वाली गायें हैं, ऐसे में उनको उन्हीं गायों से साहीवाल सहित अन्य दुधारू देसी बछिया मिलेंगी। इससे किसानों की दोगुनी आय का सपना साकार होगा। -डॉ. राजकुमार सिंह, निदेशक आईवीआरआई

पाकिस्तानी मूल की है साहीवाल गाय
साहीवाल नस्ल की गाय पाकिस्तान में साहीवाल जिले से उत्पन्न मानी जाती हैं। गहरा शरीर, ढीली चमड़ी, खाल चिकनी होती है। पूंछ पतली और छोटी होती है। यह गाय 12 से 18 लीटर तक दूध देने कि क्षमता रखती है। बरेली के अखा गांव में साहीवाल का 21 लीटर दूध एक दिन में रिकार्ड किया गया था। इसके दूध में पर्याप्त वसा होता है।

पीएम की पाठशाला में जाएंगे 10 पशु चिकित्सक 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम का शुभारंभ करने के लिए मथुरा की वेटेरिनरी यूनिवर्सिटी में आ रहे हैं। बरेली से पशुपालन विभाग के दस पशु चिकित्सक प्रधानमंत्री मोदी की पाठशाला में शामिल होने के लिए मथुरा भेजे गए हैं।

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