चुनाव मैदान से बाहर टीम आडवाणी के अधिकांश चेहरे

भाजपा के एक दर्जन से ज्यादा बड़े चेहरे, जिनमें अधिकांश टीम आडवाणी का अहम हिस्सा रहे हैं, इस बार लोकसभा चुनाव के मैदान से बाहर हैं। इनमें खुद लालकृष्ण आडवाणी, डा. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, शांता कुमार, बी सी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, करिया मुंडा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सुषमा स्वराज भी चुनाव लड़ने से मना कर चुकी हैं और अरुण जेटली (राज्यसभा सदस्य) भी इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
भाजपा के दो से 282 तक के सफर में हर लोकसभा चुनाव में लड़ने व लड़ाने वाले अधिकांश नेता इस बार चुनाव मैदान से बाहर हैं। यह वो नेता हैं जो भाजपा संगठन में लालकृष्ण आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति में उभरे और चुनावी जंग में उतरते रहे हैं। इसमें एक बड़ी वजह अघोषित रूप से 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को लोकसभा का चुनाव न लड़ाना शामिल है।

पांच साल में बड़े बदलाव : 
बीते लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष थे और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार। उस समय लोकसभा चुनाव लड़ने वालों में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, अनंत कुमार, बंडारू दत्तात्रेय, करिया मुंडा, कलराज मिश्रा, उमा भारती, बी सी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, सुमित्रा महाजन जैसे बड़े नाम थे।
जेटली पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने अमृतसर सीट पर उतरे थे, लेकिन हार गए थे। अनंत कुमार का निधन हो चुका है और चुनाव लड़ाने वालों में अहम भूमिका निभाने वाले वेंकैया नायडू अब उप राष्ट्रपति बन चुके हैं। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन का नाम अभी अधर में है।
आए नए रणनीतिकार :
अब इस चुनाव में भाजपा की नई पीढ़ी सामने है जिसकी कमान प्रधानमंत्री व अमित शाह संभाल रहे हैं। नए रणनीतिकारों में भूपेंद्र यादव, जे पी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, अनिल जैन, कैलाश विजयवर्गीय, राम माधव, मुरलीधर राव, हेमंत बिस्वसरमा, निर्मला सीतारमण, देवेंद्र फडणवीस, योगी आदित्यनाथ जैसे नाम जुड़े हैं। ये सभी ऐसे चेहरे हैं जो लोकसभा के मैदान में नहीं हैं, लेकिन चुनावी प्रबंधन व प्रचार के केंद्र में हैं।

ये हैं आडवाणी टीम के प्रमुख चेहरे :
डॉ. मुरली मनोहर जोशी :
 वर्ष 1980 में डॉ. जोशी ने भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे। वह 1991 से 1993 तक भाजपा के अध्यक्ष रहे। 1996, 1998 एवं 1999 में इलाहाबाद से सांसद चुने गए। 15वीं लोकसभा में वाराणसी संसदीय सीट से जीत दर्ज की। 1996 में 13 दिनों के लिए बनी भाजपा सरकार में गृहमंत्री का पदभार संभाला था। 16वीं लोकसभा में वह कानपुर से चुनाव जीते।

शांता कुमार : हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार 1965 में कांगड़ा के जिला पंचायत अध्यक्ष बन गए थे। 1972 में वह विधायक और 1977 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। 1999 में वाजपेयी सरकार में वह केंद्रीय मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं।

कलराज मिश्र : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश की देवरिया सीट से मौजूदा सांसद हैं। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में भी मंत्री रहे।

उमा भारती : मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। वर्तमान में केंद्र की भाजपा सरकार में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री हैं। वह स्वयं इस बार चुनाव न लड़ने की इच्छा जता चुकी हैं।

सुषमा स्वराज : वर्तमान में विदेशमंत्री। मध्य प्रदेश के विदिशा से लोकसभा सांसद हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता 15वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता चुनी गई थीं। भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक हैं।

करिया मुंडा : 15वीं लोकसभा में उपाध्यक्ष रहे। वह 1999 में भाजपा की 13 दिन की सरकार के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे।

बी.सी. खंडूड़ी : साल 2007 से 2009 और फिर 2011 से 2012 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। वह 16वीं लोकसभा में सांसद हैं।

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