उत्तर प्रदेश: दो साल में शिक्षामित्रों के आधे पद भी नहीं भरे गए

उत्तर प्रदेश परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट से निरस्त होने के दो साल बाद तक सरकार इनमें से आधे पद नहीं भर सकी है। इसका सबसे अधिक नुकसान स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई पर पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त होने के बाद रिक्त हुए पदों पर सरकार को दो चरणों में नियुक्ति करना था। पहले चरण में 68500 शिक्षक भर्ती के लिए लिखित परीक्षा मई 2018 में हुई। इसमें 5 सितंबर 2018 को नियुक्ति पत्र बांट दिए गए थे। लेकिन गैर राज्य से प्रशिक्षण लेने वाले व पांच साल निवास की शर्त पूरा नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को भी अवसर देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा परिषद इन अभ्यर्थियों से नये सिरे से आवेदन लेने की तैयारी कर रहा है। यानी 68500 शिक्षक भर्ती अभी पूरी नहीं हो सकी है। जबकि 69000 शिक्षक भर्ती के लिए 6 जनवरी को परीक्षा हुई पर कटऑफ विवाद के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 1171 शिक्षामित्र निराश
बतौर शिक्षक समायोजन रद किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर क्यूरेटिव याचिका के भी खारिज होने से शिक्षामित्र निराश हैं। उन्हें शिक्षक बनने की अंतिम उम्मीद खत्म हो गई लगती है। शिक्षामित्रों के संगठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने में जुटे हैं। जिले में 1171 शिक्षामित्रों का समायोजन हुआ था।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में पूरे प्रदेश में 1.76 लाख शिक्षामित्रों का दो चरणों में शिक्षक पद पर समायोजन हुआ था। इनमें वाराणसी में पहले चरण में 541 और दूसरे चरण में 630 अर्थात दो चरणों में 1171 शिक्षमित्रों का चयन हुआ था। करीब एक वर्ष बतौर शिक्षक  पढ़ाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इनका समायोजन रद कर दिया। इस पर काफी बवाल मचा था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्होंने फिर हड़ताल की। पूरे प्रदेश में धरना- प्रदर्शन हुआ। तब उनका मानदेय बढ़ा कर दस हजार कर दिया गया।

रामनगर में कार्यरत शिक्षामित्र गौरव सिंह कहना है कि जब वह शिक्षक के रूप में समायोजित हुए तो वेतन 3500 से सीधे 37, 000 रुपए हो गया था। अब दस हजार मिल रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में दोबारा मामला जाने पर कुछ उम्मीद थी मगर अब निराशा है।

TET क्वालीफाई कर 100 टीचर बने
प्रदेश सरकार ने शिक्षा मित्रों को राहत देने के लिए दो टीईटी में वेटेज देने का फैसला किया था। पहली टीईटी में बड़ी संख्या में शिक्षामित्र शमिल हुए। उनमें करीब 100 शिक्षामित्रों ने टीईटी क्वालीफाई किया और शिक्षक बन गए। दूसरी टीईटी में उनके लिए और भारांक बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इसी पर मामला फिर कोर्ट में चला गया है जिससे भर्ती रूकी हुई है।

शिक्षामित्रों का कहना है कि अगर बढ़े हुए भारांक पर भर्ती हुई तो कुछ और शिक्षमित्रों को फायदा हो जाएगा। इसके अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। कई शिक्षामित्रों की आयु सीमा समाप्त हो चुकी है।

नई शिक्षा नीति से उम्मीद
आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयल एसोसिएशन के संयोजक अमरेंद्र दुबे का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति के तहत भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा गया है। मंत्रालय से मांग की गई है कि शिक्षमित्रों के समायोजन का भी रास्ता निकाला जाए। ऐसे स्थिति पूरे देश की है। दुबे को उम्मीद है कि नई शिक्षा नीति में उनका ख्याल रखा जाएगा।

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